नहाए खाए के साथ छठ पर्व की शुरुआत,ज्यादातर लोग घर मे ही करेंगे पूजा

 


शुक्रवार को डूबते सूर्य को देंगे अर्ध्य





धमतरी। उत्तर भारत में मनाए जाने वाला आस्था का पर्व छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस बार षष्ठी तिथि 20 नवंबर शुक्रवार को है। छठी मइया को अर्घ्य देने के लिए भक्त 20 नवंबर की शाम पानी में उतरेंगे। इसके बाद 21 नवंबर की सुबह उगते हुए सूरज को अर्घ्य देकर छठ पूजा  का समापन किया जाएगा।छठ पर्व  की शुरुआत नहाए-खाए से बुधवार सु शुरू हुई। इसके बाद 19 नवंबर को खरना या लोहंडा मनाया जाएगा। इस दिन बेहद ही स्वादिष्ट गन्ने की रस की खीर बनाई जाती है। इसके बाद प्रसाद के भरी बांस की टोकरी जिसे दउरा या दौरा भी कहा जाता है.



चार दिन तक चलने वाले छठ पूजा पर्व पर यूपी, बिहार और झारखंड में जबरदस्त उत्सव और उत्साह का महौल देखने को मिलता है। धमतरी में भी अमतलाब, रुद्री महानदी में भी लोग इकट्ठे होकर यह पर्व मनाते हैं ।इस बार कोरोना महामारी का प्रकोप होने के चलते कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में पाबंदियां लगी हुई हैं। इसके बादजूद भी लोगों का जुनून और आस्था कम होती नहीं दिख रही।


छठ पूजा की शुरुआत षष्ठी तिथि से दो दिन पूर्व चतुर्थी से हो जाती है जो कि इस बार बुधवार को है। चतुर्थी को नहाय-खाय होता है। नहाय-खाय के दिन लोग घर की साफ-सफाई/पवित्र करके पूरे दिन सात्विक आहार लेते हैं। इसके बाद पंचमी तिथि को खरना शुरू होता है जिसमे व्रती को दिन में व्रत करके शाम को सात्विक आहार जैसे- गुड़ की खीर/ कद्दू की खीर आदि लेना होता है। पंचमी को खरना के साथ लोहंडा भी होता है जो सात्विक आहार से जुड़ा है।



षष्ठी को रखते हैं निर्जला व्रत-

छठ पूजा के दिन षष्ठी को व्रती को निर्जला व्रत रखना होता है। यह व्रत खरना के दिन शाम से शुरू होता है। छठ यानी षष्ठी तिथि के दिन शाम को डूबते सूर्य को अर्घ देकर अगले दिन सप्तमी को सुबह उगते सूर्य का इंतजार करना होता है। सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ देने के साथ ही करीब 36 घंटे चलने वाला निर्जला व्रत समाप्त होता है। छठ पूजा का व्रत करने वालों का मानना है कि पूरी श्रद्धा के साथ छठी मइया की पूजा-उपासना करने वालों की मनोकामना पूरी होती है।

अमतलाब रोड निवासी श्री चौधरी ने बताया कि इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए ज्यादातर लोग घरों में ही पूजा करेंगे वह खुद छत में पानी रखने की व्यवस्था कर पूजा करेंगे। आमा तालाब में 20 से 25 परिवार हर वर्ष इकट्ठे होते थे बुधवार को नहाए खाए के साथ शुरू हो चुका है ।20 को मुख्य पर्व मनाया जाएगा जिसमें सूर्य को संध्या अर्ध देकर शनिवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन होगा



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