पलायन कर रहे सैंकड़ो ग्रामीणों को जिपं अध्यक्ष ने समझाइश देकर भेजा घर, CEO को लगाई फटकार

 


दंतेवाड़ा।जनप्रतिनिधि और सरकारी नुमाइंदे ग्रामीणों को उनके गांव में ही रोजगार मुहैया कराने का दावा करते नहीं थकते, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। दक्षिण बस्तर में शासन-प्रशासन के तमाम वादों और दावों के बीच पलायन का जिन्न रह-रहकर बोतल के बाहर निकल ही जाता है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरूष व महिलाएं रोजगार की तलाश में पड़ोसी राज्यों की ओर पलायन करने दंतेवाड़ा बस स्टैण्ड पहुंचे । इनमें कटेकल्याण ब्लॉक के ग्राम पंचायत चिकपाल, टेटम, परचेली के सैकड़ों ग्रामीण शामिल थे। इस बात की जानकारी जैसे ही जिला पंचायत अध्यक्ष तुलिका कर्मा को मिली‚ वे स्वयं बस स्टैण्ड पहुंची और पलायन कर रहे ग्रामीणों को रुकवाया


 पलायन के पीछे बड़ा गिरोह सक्रिय

तुलिका ने आरोप लगाया कि जिले के ग्रामीणों को पलायन कराने एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है जो ग्रामीणों को मोटी रकम दिलाने का वादा कर अपने साथ ले जाते हैं और उनका शोषण करते हैं। कोरोना काल में भी दूसरे राज्यों में पलायन कर गए कई मजूदरों को छुड़ाया गया था। मौके पर पहुंचे जिला पंचायत सीईओ अश्वनी देवांगन ने बताया कि जिले में मनरेगा के माध्यम से सभी को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। किसी भी पंचायत में काम की कमी नहीं है। भोले-भाले ग्रामीणों को बाहरी ठेकेदार पैसे का लालच देकर अपने साथ ले जाते हैं।



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