जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में डेडिकेटेड कोविड वार्ड के अलावा बनाए गए आठ डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर

 

ऑक्सीजनयुक्त 372 और 1090 सामान्य बिस्तर कोविड के मरीजों के लिए उपलब्ध




धमतरी 13 अप्रैल 2021/ कोविड 19 के धनात्मक मरीजों की भर्ती एवं प्रबंधन के लिए जिले में  जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में स्थित डेडिकेटेड कोविड वार्ड के अलावा आठ अन्य डेडिकेटेड कोविड केयर सेन्टर बनाए गए हैं। ज़िले में इस तरह से कोविड मरीजों के लिए 1462 बिस्तर उपलब्ध है। इसमें से 372 ऑक्सीजनयुक्त और 1090 सामान्य बिस्तर हैं। मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में उपलब्ध 80 बिस्तर में से 50 ऑक्सीजनयुक्त और 30 सामान्य बिस्तर हैं।

 
लाईवलीहुड काॅलेज स्थित डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर क्रमांक-01 में उपलब्ध 175 में से 10 ऑक्सीजनयुक्त और 165 सामान्य, सेंटर क्रमांक-02 में उपलब्ध 135 में से पांच आॅक्सीजनयुक्त और 130 सामान्य, गोकुलपुर छात्रावास में उपलब्ध 80 में से पांच ऑक्सीजनयुक्त, 75 सामान्य, पंचायत ट्रेनिंग सेंटर कुरूद में उपलब्ध 50 में से 35 आॅक्सीजनयुक्त, 15 सामान्य, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नगरी में उपलब्ध 50 में से 45 ऑक्सीजनयुक्त और पांच सामान्य तथा निजी चिकित्सालयों में स्थित डेडिकेटेड कोविड वार्ड में उपलब्ध 342 बिस्तर में से 222 ऑक्सीजनयुक्त और 120 सामान्य बिस्तर हैं। पाॅलीटेक्निक धमतरी स्थित डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर में 200, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चरमुड़िया में 100 और नवीन आदिवासी बालिका छात्रावास स्थित कोविड केयर सेंटर में ढाई सौ सामान्य बिस्तर उपलब्ध हैं।



कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी  जय प्रकाश मौर्य ने उक्त बिस्तर के प्रबंधन का अधिकार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.डी.के.तुर्रे, अधीक्षक जिला अस्पताल तथा खण्ड चिकित्सा अधिकारी को सौंपा है। साथ ही निजी अस्पताल के डेडिकेटेड कोविड वार्ड का जिम्मा भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपा गया है। उन्होंने निर्देशित किया कि जिले के कोविड मरीजों को आवश्यकता अनुरूप बेड उपलब्ध कराया जाए ना कि, मांग के आधार । मरीजों के लिए बेड की जरूरत उनके स्वास्थ्य के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सक तय करेंगे। साफ तौर पर निर्देशित किया गया है कि अस्पतालों में कोविड संक्रमण से बचने के सभी उपायों का पालन करना अनिवार्य होगा। 


 

इस संबंध में वहां कार्यरत डाॅक्टर, नर्स, सफाई कर्मी,चौकीदार इत्यादि को विशेष प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी कोविड केयर संचालक की होगी। लिपिकीय कार्य और डेटा एंट्री आॅपरेटर इत्यादि की ड्यूटी संबंधित अनुविभागीय अधिकारी द्वारा लगाई जाएगी, जिसका वित्तीय प्रबंधन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा किया जाएगा। बताया गया है कि कोविड केयर सेंटर्स में साफ-सफाई इत्यादि प्रबंधन के लिए यदि अतिरिक्त कर्मी की जरूरत होगी, तो उसका प्रबंधन भी सीएमएचओ द्वारा किया जाएगा।
गौरतलब है कि ज़िले के हर ग्राम पंचायत में एक अथवा दो आइसोलेशन सेंटर की स्थापना की गई है, जरूरत पड़ने पर जिसकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। कलेक्टर ने कहा है कि होम आइसोलेशन के निर्देश काफी कड़े हैं, जिसका पालन नहीं होने पर ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी, कि ऐसे मरीज जिनके घर पर अटैच बाथरूम-लेट्रीन युक्त कमरा नहीं हो, उन्हें किसी भी सूरत में होम आइसोलेशन के लिए मान्य नहीं किया जाए। ऐसे मरीज को ग्राम पंचायत में स्थापित आइसोलेशन सेंटर अथवा डेडिकेटेड कोविड केयर अस्पताल में रहना होगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि कोई मरीज अथवा उसका परिवार आइसोलेशन के नियमों का पालन नहीं करता है, तो ऐपिडेमिक एक्ट 1897 के तहत एफ.आई.आर. दर्ज कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिव की होगी। उन्होंने कहा कि कोमाॅर्बिड, 60 वर्ष से अधिक के व्यक्ति, ऐसी गर्भवती माताएं जिनका गर्भधारण सात माह से अधिक हो तथा ऐसे मरीज जिनका आॅक्सीजन लेवल 93 प्रतिशत से कम हो, उन्हें आईसोलेशन सेंटर में नहीं रखा जाएगा, बल्कि तत्काल संबंधित डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर में भर्ती कराने की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायत सचिव की होगी। कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि जो मरीज जिस विकासखण्ड का निवासी है, उसे पात्रतानुसार उस विकासखण्ड में स्थित डेडिकेटेट कोविड केयर अस्पताल में भर्ती किया जाए।
कलेक्टर ने कहा कि निगरानी काॅटेक्ट ट्रेसिंग एवं निगरानी के लिए अन्य कर्मचारियों तथा समुदाय का सहयोग लिया जा सकता है। इसके तहत शिक्षक एवं अन्य विभाग के कर्मचारियों के अलावा अनुविभागीय दण्डाधिकारी को यह अधिकार दिया गया है कि वे इस कार्य में नगरीय निकायों के नवयुवक नेहरू युवा केन्द्र के युवक, स्व सहायता समूह के सदस्य, रेडक्राॅस के वाॅलिन्टियर्स को भी लगा सकते हैं। जिले के निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड का उपयोग किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निजी अस्पतालों से समन्वय स्थापित कर वहां मरीजों का प्रबंधन करने का पूरा अधिकार सौंपा गया है। जिला दण्डाधिकारी ने साफ तौर पर कहा है कि आयुष्मान कार्ड के तहत भारत शासन द्वारा निर्धारित दर से अधिक भुगतान लिए जाने पर संबंधित अस्पताल प्रबंधन के ऊपर कठोर दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पहले दिन कई क्वारंटाइन सेंटर में सुविधा नहीं होने की शिकायत मरीज कर रहे थे। नगरी मगरलोड एवं अन्य जगहों से लोगों ने शिकायत की है। इस संबंध में कलेक्टर ने कहा कि धीरे-धीरे धीरे सभी सुविधाएं उपलब्ध हो जायेगी।


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