आखिर कौन थी जुल्ले


नक्सली प्रमिला उर्फ राजुला के परिजन पहुंचे धमतरी

 

भूपेंद्र साहू
 धमतरी पुलिस नक्सली मुठभेड़ में मांदागिरी के जंगल में मारी गई नक्सली प्रमिला और राजुला के परिजन फल्लेवाय थाना भैरमगढ़ से सोमवार की शाम धमतरी पहुंचे और पहुंचकर उन्होंने प्रमिला के शव की शिनाख्त की है ।पुलिस कार्रवाई के पश्चात शव को परिजनों के साथ भैरमगढ़ फलवाय के लिए रवाना कर दिया गया ।गौरतलब है कि थाना मेचका क्षेत्र के सदबाहरा मंदागिरी के जंगल में एसटीएफ और डीआरजी की संयुक्त टीम ने घेरकर चार नक्सलियों को मार गिराया था। जिसमें से मंजुला उर्फ दीपा और उर्फ दुर्गा  ग्राम रेगढ़गट्टा थाना भेज्जी जिला सुकमा,मुन्नी उर्फ रश्मि ग्राम पल्लेवाड़ा थाना भैरमगढ़ जिला बीजापुर,राजुला उर्फ प्रमिला बीजापुर क्षेत्र और राजू ग्राम हलयनार थाना अमाबेड़ा जिला कांकेर हैं ।चारो शव का जिला अस्पताल धमतरी में पोस्टमार्टम के बाद फ्रीजर में रखा गया था और परिजनों का इंतजार किया जा रहा था। लगभग 48 घंटे में प्रमिला के परिजन ग्राम फल्लेवाय थाना भैरमगढ़ जिला बीजापुर से पहुंचे जिसमें उनका बड़ा भाई बुधराम तेलाम एक अन्य भाई बुधराम कुंजाम व विनय कुंजाम  पहुंचे। शव की शिनाख्त के बाद स्थानीय पुलिस के द्वारा मदद कर उन्हें गाड़ी मुहैया कराया गया और शव को रवाना किया गया ।
शव की  सुरक्षा में पुलिस जवान

इस संबंध में कोतवाली थाना प्रभारी प्रणाली वैद्य ने बताया कि फल्लेवाय थाना भैरमगढ़ से परिजन पहुंचे हैं और उन्होंने राजुला की शिनाख्ति कर दी है ।शव को रवाना किया गया ।

सन 2000 से निकली थी जुल्ले

राजुला के भतीजा ने बताया कि प्रमिला उसका वास्तविक नाम नहीं है।ज़ुल्ले  उसका असली नाम था और सन 2000 से 17-18वर्ष की उम्र में निकल चुकी थी। वह अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थी, जो आया है बुधराम वह सबसे बड़ा भाई है अभी इसके माता-पिता का निधन हो चुका हैं ।विनय कुंजाम ने बताया कि उसका क्षेत्र नक्सल प्रभावित है लेकिन अब नक्सली क्षेत्र में नहीं आते हैं ।इतने दिनों तक ज़ुल्ले कहां थी क्या करती थी इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। थाना से सूचना मिलने के बाद वह शव को ले जाने पहुंचे 

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