जो फैसला है, वह सब पीड़ाओं को भुलाकर खुशी देने वाला है: सुरेशचंद बघेल

 
सुरेशचंद बघेल
रविंद्र चोपड़ा 
अयोध्या। अयोध्या कांड के डायनामाइट हीरो सुरेशचंद बघेल का कहना है कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है, वह इतना स्वागत योग्य है कि उसके लिए उनके पास कहने को शब्द भी नहीं हैं। बताया कि राम मंदिर के आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1990 को अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराने के मामले में राम जन्मभूमि थाना पुलिस द्वारा मेरी गिरफ्तारी की गई थी। मुझे विस्फोटक अधिनियम एवं सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की धाराओं में गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद उनके ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून एवं टाडा में भी कार्रवाई की गई, जिसमें उन्हें सत्र न्यायालय से 5 साल की सजा और 4 हजार रुपए का जुर्माना हुआ था। इस मामले में वे साढ़े 3 साल जेल में रहे। हाईकोर्ट के आदेश पर वे फिलहाल निर्णय आने तक जमानत पर हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर पर जो निर्णय दिया है, वह उनके मन को बहुत खुशी देने वाला है। भले ही इस आंदोलन के दौरान उन पर लगे मुकदमों में उनका परिवार छिन्न-भिन्न हो गया और लाखों रुपए खर्च हो गए, फिर भी आज का जो फैसला है, वह उन सब पीड़ाओं को भुलाकर खुशी देने वाला है।

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