कूटरचित दस्तावेज से बने शिक्षाकर्मी, न्यायालय ने सुनाई 5- 5 साल की सजा



धमतरी।फर्जी दस्तावेज से नौकरी हासिल करने वालों की अब खैर नहीं ।न्यायालय के  बड़े फैसले आने शुरू हो गए हैं ऐसा ही एक फैसला धमतरी  जिला न्यायालय से आया है ।फर्जी दस्तावेज दिखाकर शिक्षा कर्मी की नौकरी हासिल करने वाले 10 लोगों को सीजेएम कोर्ट ने 5-5 साल की सजा एवं 25000 की अर्थदंड सुनाई है। न्यायालयीन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 22 जुलाई 2011 को आरटीआई कार्यकर्ता चंदना निवासी कृष्ण कुमार साहू ने जनपद पंचायत मगरलोड में भर्ती हुए शिक्षा कर्मी वर्ग 3 में फजीर्वाड़ा होने की शिकायत की थी इस मामले में मगरलोड पुलिस ने 10 शिक्षाकर्मियों के खिलाफ आइपीसी की धारा 420,467, 468 ,471,34 के तहत मामला दर्ज किया था ।
 
यह मामला कुरूद न्यायालय से धमतरी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोना चौहान के कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था जिसकी सुनवाई सोमवार 10 फरवरी को हुई ।इस मामले में न्यायालय ने पिलेश्वर साहू, धर्मेंद्र ठाकुर, खेमन लाल साहू ,ललेश साहू, नारायण कश्यप, जितेंद्र साहू, सुरेश यादव, त्रिवेणी साहू ,मेनुका दीवान और दुर्गा साहू को धारा 420 के तहत 5 साल एवं ₹10000 अर्थदंड धारा 467 के तहत 5 साल की सजा एवं ₹10000 के अर्थदंड और धारा 471 के तहत 1 साल की सजा एवं ₹5000 के अर्थदंड से दंडित किया है ।ज्ञात हो कि कृष्ण कुमार साहू ने इसकी शिकायत की थी और जिले में सैकड़ों ऐसे और शिक्षाकर्मी है जो फर्जी दस्तावेज से नौकरी हासिल किए हैं उन पर भी तलवार लटक सकती है ।कृष्ण कुमार ने बताया कि जितेंद्र और त्रिवेणी 12वी पढ़े ही नहीं थे जितेंद्र तांत्रिक स्कूल रायपुर में 12वींपढ़ना बताया था जबकि यह स्कूल अस्तित्व में नहीं है ।इसी प्रकार से सभी 10 नौकरी पाने वाले आरोपी बारहवीं पास नही थे।

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