इम्युनिटी को इंजेक्शन/कैप्सूल/टेबलेट्स से नहीं, बल्कि हमारे घरेलू खाद्य सामग्रियों से बढ़ाया जा सकता है




इन्दौर। रोग प्रतिरोधक क्षमता और होम्योपैथी पर राष्ट्रीय सेमिनार को वीडियो के द्वारा आॅनलाइन सम्बोधित किया। पायोनियर ग्रुप आॅफ इन्स्टीट्यूट, इन्दौर द्वारा आयोजित रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) और होम्योपैथी को आॅनलाइन सम्बोधित करते हुये डाॅ. ए.के. द्विवेदी ने कहा कि, लोग इम्युनिटी बढ़ाने के लिये ऐसा सोचते हैं कि सब कुछ इंजेक्शन, कैप्स्यूल या टेबलेट के रूप में मिल जाय, उस कारण से घर में उपलब्ध इम्युनिटी बढ़ाने के पदार्थों की या तो अवहेलना करते हैं या फिर उनका सेवन ही नहीं करते हैं। आपने, इस सम्बोधन के दौरान बताया कि घर में उपलब्ध गुड़-चना, दूध-हल्दी, गुड़-दलिया, नींबू-आँवला, अदरक-तुलसी, बादाम, सोयाबीन का उपयोग न करते हुये जो चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं है उनकी बात करते हैं जैसे- ब्रोकली, किवी, मशरूम, गिलोय इत्यादि की, जो आसानी से हर समय उपलब्ध भी नहीं होती है और घर के लोगों को कम पसन्द आती है।
डाॅ. द्विवेदी ने अपने सम्बोधन में बताया कि बच्चों को उनकी पसन्द की चीजें खाने के लिये दीजिये उनकी पसन्द के अनुसार चीजों का चयन करें। उससे भी उनकी इम्युनिटी को बढ़ाया जा सकता है। आपने कहा कि जैसे बच्चों की स्वास्थ्य और इम्युनिटी के लिये ध्यान देने की आवश्यकता है ठीक वैसे ही बुजुर्गों के भी स्वास्थ्य और इम्युनिटी को बेहतर रखने की आवश्यकता है। आपने कहा कि घर में जैसे सभी बातों/चीजों के लिये बजट होता है, वैसे ही हेल्थ का भी बजट बनायें और उस बजट से कुछ अन्तराल में जाँच करायें तथा ड्रायफ्रूट्स खरीदकर खायें, शायद आपको अस्पताल जाना ही न पड़े और दवाईयाँ खाने से बच सकें।
 
आपने, योग, प्राणायाम, मेडिटेशन के साथ-साथ रनिंग (दौड़ना) साइक्लिंग (सायकल चलाना) तथा स्वीमिंग (तैरने) की भी सलाह दी। अन्त में बताया कि होम्योपैथी की दवाईयाँ यदि बचपन से ही दी जाये तो अस्थमा, टान्सिल, ब्रोन्काइटिस व प्राइमरी काॅम्पलेक्स की परेशानी ही नहीं होती। साइनस, एलर्जी, इन्फ्लूएन्जा से भी होम्योपैथी दवा बचा सकती है।संचालन डाॅ. मोना  तवर  ने किया तथा अध्यक्षता डाॅ. पी.के. जैन ने किया।

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