Video बारिश से किसानों के सैकड़ों एकड़ खेत रेत से पटे,कैसे चलेगा परिवार किसान चिंतित



नगरी।सिहावा क्षेत्र में सोमवार को हुए भारी बारिश से क्षेत्र के डेम लबालब हो गए है दुधवा , मुरुमसिल्ली या फिर गंगरेल इनके भर जाने से आगे चलकर इसका फायदा किसानों को ही मिलेगा।डैम का लबालब होना किसानों के हित मे कारगर साबित हो सकती है ।शासन चाहे तो इन्हें रबी फसल के लिए सिचाई सुविधा मुहैया करा दे। यह किसानों को  खुशहाली दे सकता है।वही सोमवार की बारिश ने सिहावा क्षेत्र के किसानों को परेशानी में डाल दिया है। कुदरत के इस आफत ने बेलरबहारा के किसानों को काफी क्षति पहुचाई है।

भारी वर्षा के चलते पहाड़ों और जंगलों का पानी किसानों के खेतों को चौपट कर दिया है। सोमवार को यहां के खेतो में बाढ़ जैसे स्थिति निर्मित थी जिसके साथ ही इन किसानों के कई एकड़ फसल रेत की नीचे दब गए है। कई किसानों ने बड़ी मेहनत से रेत हटाया है लेकिन अधिक किसानों की कृषि जमीन पर रेत पट चुकी है जो  हटाने लायक नही है यहां की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। बेलरबाहरा के किसानों ने मुआवजा राशि की मांग शासन-प्रशासन की है।

गौरतलब है कि सोमवार को जिले में सबसे अधिक 76.8 मिमी वर्षा नगरी क्षेत्र में हुई है भारी वर्षा से बालका नदी, महानदी सहित अन्य नदियां उफान पर थी ऐसे में जहां जनजीवन अस्तव्यस्त था वही क्षेत्र के कई जगहों पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है। बेलरबाहरा के किसान मंगतू राम मांझी, केशव राम नागेश, कैलाश मांझी, गोकुल धुर्वा, सगनु राम मांझी, रघु नागेश, केशव नागेश ने बताया कि हमारे खेतों में जंगल और पहाड़ों का पानी उतरता है सोमवार को भारी वर्षा हुई है जिसके कारण हमारे खेत पूरे डूब गए थे। बहाव कम होने के बाद खेत पहुचे तो देखा कि कई किसानों के खेत को पानी के बहाव के साथ आये रेत ने पाट दिया है जिससे करीब 50 किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। मेहनत से कमाई फसल पूरी तरह चौपट हो चुकी है।

किसानों का कहना है कि बड़ी मशक्कत के बाद, सोसायटी से ऋण लेकर हम सभी किसान फसल उगाए थे जिसे कुदरत के कहर ने बर्बाद कर दिया है। अब हम कैसे जीवन यापन करेंगे कैसे सोसायटी के ऋण चुकाएंगे। इसलिए हम सभी किसान शासन-प्रशासन से मुआवजा राशि की मांग करते है।

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