Video: नाव से खेत पहुंचने के बाद कमर तक पानी के बीच उतरकर धान की कटाई

 


विधायक ने कहा परेशान किसानों को राहत दिया जाए




भूपेंद्र साहू

धमतरी।बारिश का मौसम इस समय अत्यधिक लंबा होने तथा अंतिम दिनों तक बारिश होने के कारण गंगरेल बांध पूरा भर हुआ है।प्रभावित गांव में जो किसान धान का फसल लगाए थे उनकी फसल आज भी 3 फीट पानी में डूबी हुई है यहां तक कि फसल पक कर तैयार हो गई है काटने की स्थिति में वहां के कृषक कमर तक के पानी में घुसकर धान की कटाई कर रहे हैं ।कई बार उन्होंने शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया कि गंगरेल बांध का गेट खोल कर पानी को कम किया जाए तो उन्हें फसल काटने में सुविधा मिल जाएगी तथा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा । पिछले दिनों कलेक्टोरेट पहुंचकर  हनुमान प्रभावित गांव के लोगों ने पानी छोड़ने की मांग भी की थी  लेकिन अब फसल तैयार है तो मजबूरी में उन्हें पानी में डूब कर फसल की कटाई करना पड़ रहा है  विडंबना तो यह है कि  खड़ी फसल तक पहुंचने के लिए नाव  का सहारा लेना पड़ रहा है और नाव से ही वे फसल लेकर वापस लौटते हैं ।यह पहला अवसर है जब किसानों को उक्त कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। 


सैकड़ों एकड़ धान की खड़ी फसल के नुकसान का जायजा लेने तथा राहत देने के लिए कोई भी सामने नहीं आया अंत में जब किसानों ने अपने उक्त समस्याओं से विधायक रँजना साहू को पीड़ा का बयां किया तो विधायक शासन के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों को उक्त समस्याओं को अवगत कराते हुए दो बार क्षेत्र के कृषकों को राहत देने हेतु आवश्यक पहल करने की बात कही है ।इसके बाद भी जिला स्तर पर किसी भी प्रकार की पहल नहीं हुई है ।विधायक श्रीमती रंजना साहू ने कहा है कि वे अति शीघ्र कृषि मंत्री तथा सरकार के जिम्मेदार लोगों के समक्ष यह बात रखेंगे वैसे भी डूबान में जीविकोपार्जन का कृषि मत्स्य आखेट तथा जंगल के अलावा कोई अन्य साधन नहीं है खाने के लिए गर्मी में आने वाले बरसात में अन्न  का भंडारण करने के लिए किसान पानी से भरे खेतो मे घुसकर फसल कटाई कर रहे है ,डूबप्रभावित किसानों की यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण होने से सरकार के किसान हितैशी होने के खोखले दावे की पोल खोल रही है।



 गौरतलब है कि पानी के भर जाने से डूब प्रभावित किसान अपनी फसल को सूखे क्षेत्र तक नाव से लाने के लिए ही एक मात्र साधन अपनाते हैं वही फसल को लाने के पश्चात लगभग 10 दिनों तक उसे सुखाना पड़ रहा है क्योंकि फसल कटाई के पश्चात पानी के ऊपर ही रहता है इसलिए मिंजाई करने के बाद पैदा हुई धान को किसानों औने पौने दाम में बेचने के लिए भी मजबूर हो जाते हैं ऐसे में किसानों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों के फरियाद के बाद भी सिंचाई व अन्य विभाग के जिम्मेदार लोग डूब प्रभावित किसानों की सुध लेने के लिए नहीं।



इस संबंध में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी मिरेन्द्र साहू ने बताया कि किसानों की समस्या को उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

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