उधर दिल्ली इधर दुगली:6 पंचायत के हजारों किसान 48 घंटे से डटे,यातायात बाधित

 


 दुगली में कई वर्षों से मांग रहे धान खरीदी केंद्र


धमतरी/नगरी।राजीव गांधी ग्राम दुगली समेत आस पास के 6 पंचायत के हजारों किसानों ने दुगली में धान उपार्जन केन्द्र खोलने की मांग को लेकर दुगली में 30 नवंबर से सत्याग्रह में जुट गए है। किसान कलेक्टर से सीधे बात करने की जिद पर अड़े हुए हैं। कड़ाके की ठंड में रात भर वही खुले आसमान में सोना पड़ा।

जिस दुगली को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने गोद लेकर वहां के स्थानीय लोगों के विकास का सपना देखा था आज उसी क्षेत्र के किसान सड़क पर उतर गए हैं। यह बड़ी विडंबना है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का ही शासन है और उस क्षेत्र की विधायक भी कांग्रेस की है। बावजूद इसके आज राजीव गांधी के इस प्रिय गांव का हाल सुनने वाला कोई नहीं है ।दुगली में धान उपार्जन केंद्र खोलने की मांग लेकर ठंड के मौसम में किसान हाईवे में डटे हुए हैं जिससे लगातार यातायात बाधित हो रही है। आने जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को नगरी एसडीएम पहुंचे थे लेकिन किसानों ने साफ कर दिया कि वे सिर्फ कलेक्टर से ही बात करेंगे।



 नगरी जनपद अध्यक्ष दिनेश्वरी नेताम ,जनपद कृषि सभापति बंसीलाल सोरी, सरपंच दुगली रामकुंवर मंडावी, सरपंच कौहाबाहरा शिवा नेताम, सरपंच कोलियारी तुलसी मंडावी, सरपंच मुनईकेरा महेन्द्र नेताम, सरपंच गुहानला घासी राम नेताम आदि का कहना है कि 25-30 किलोमीटर तक की दूरी तय कर कृषक धान बेचने परेशान होते हुए गट्टासिल्ली जाते हैं। अगर दुगली में धान उपार्जन केन्द्र खोल दिया जाता है तो आम किसानों को समुचित लाभ होगा जहां समय के साथ कृषक को नजदीक, मुख्य मार्ग सेन्टर जगह व आवागमन में कोई परेशानी नहीं होगी। मिलरों को भी धान उठाव में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होगी व किसानों को समय रहते धान बेचने मे भी सहुलियत होगी। 



उन्होंने बताया कि दुगली क्षेत्र के ग्राम पंचायतों के ग्राम दुगली, कौहाबहारा, मुनईकेरा, देवगांव, दिनकरपुर, बिरनपारा, बांधा, मोहमल्ला, गोहाननाला, कोलियारी, जबर्रा, केरामुडा, पालगांव व आसपास अन्य ग्रामों के किसानों को इसका लाभ मिलेगा। आसपास के सभी किसानों ने वन विभाग के मिस्ट चैंबर के बाजू की खाली जमीन को खरीदी केन्द्र के लिए चयनित भी किया है।


 विधायक के प्रति नाराजगी 

सिहावा विधानसभा क्षेत्र के विधायक के प्रति किसानों में नाराजगी देखी गई। किसानों का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए उन्हें चुना गया था और आज 48 घंटे बीत जाने के बाद भी विधायक ने किसानों की सुध नहीं ली है और न ही किसी प्रतिनिधि को भेजा है। वह एक महिला हैं और आज आंदोलन में महिलाओं की यह स्थिति है कि खुले आसमान में वे सोने को मजबूर है।


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