मुख्यमंत्री की अपील और प्रशासन की पहल से दीया कारोबार को मिली संजीवनी,

 

मिट्टी के दियों की मांग हुई तेज,कुम्हारों के घर भी मनेगी दीवाली

उत्तम साहू
बालोद। दीवाली के करीब आते ही अंचल के बाजारों में रौनक दिखाई देने लगी है।सिकोसा ,करहीभदर,बालोद के साप्ताहिक बाजार में मिट्टी से बने दीये, कलश,ग्वालिन की मांग रही।बाजार में15से20रु दर्जन में दीये बिक रहे हैं और इस साल दीपावली के मौके पर स्थानीय कुम्हारों द्वारा बनाये गए मिट्टी के दीयों और घर सजाने की वस्तुओं को मुख्यमंत्री की अपील का व्यापक असर दिखाई दे रहा है।मुख्यमंत्री की अपील से कुम्हारों द्वारा बनाये गए दीयों की मांग बढ़ गई है।जिलाधीश रानू साहू ने भी विभिन्न स्थानों पर गांव के कुम्हारों को बिना कोई टैक्स लिए प्राथमिकता से जगह उपलब्ध कराने का निर्देश जारी कर दिया है। शासन प्रशासन की इस व्यवस्था से जिले के कुम्हारों को इस दिवाली दीयों की खूब बिक्री होने और अच्छा फायदा होने की उम्मीद हो गई है।जिले के सभी विकासखंड के कुम्हारों सहित महिला स्वसहायता समूह के लोग भी मिट्टी और गोबर के दिये बनाने में जुट गए हैं।कुम्हार पिछले साल की तुलना में ज्यादा बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। दीयों की मांग बढ़ी तो कुम्हारों के चेहरे खिले हुए दिखने लगे हैं।अब इस साल उनके घर दीवाली मनेगी।

छत्तीसगढ़ के मुखिया भूपेश बघेल की अपील के बाद इन दिनों हर घर में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले ओर विभिन्न प्रकार के डिजाइनों के दीये (दीपक) बनाने वाले बाज़ारों व फुटपाथ पर देखे जा सकते हैं। ग्राम ओरमा, नेवारीकला, सिकोसा में लगभग दो दशक से अधिक समय से मिट्टी के बर्तन और दीपक बनाने का काम करने वाले कुम्हारों का कहना है कि मुख्यमंत्री की जनता से मिट्टी के दीये एवं मिट्टी से बनी अन्य सामग्री का उपयोग करने की अपील के बाद इस बार उनके पास दीये और अन्य सामग्री की माँग बढ़ गई है। हर साल सामान्य रूप से मिट्टी के दीपक बनाते रहे हैं। लेकिन इस बार दीपक की डिजाइन और खूबसूरत कर दी गई है जिससे लोगों को यह पसंद आ रहे है। अच्छा ख़ासा मुनाफ़ा भी होने की उम्मीद है । अभी बिक्री ने गति पकड़ी है।  बाज़ारों में ग्राहकों को लुभाने के लिए मिट्टी के परम्परागत दीयों के साथ डिजायनर, रंग-बिरंगे और आकर्षक आकार वाले दीये भी मिल रहे हैं। दीयों के पारम्परिक स्वरूप से आकर्षक लुक ग्राहकों को ज्यादा पसंद आ रहा है। आकर्षक डिजायन की वजह से बच्चे दीयों को खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कुम्हारों का कहना है कि बीते कुछ सालों में दीयों की खरीदारी औपचारिकता भर रह गई थी। अब ग्राहक दीपावली पर रोशनी के लिए बिजली की झालरों की जगह मिट्टी के दीपक से घरों को रोशनी से सजाने का मन बना चुके हैं। जिले के कुम्हार कारीगरों की मानें तो बीते कई सालों से मंद पड़े दीया कारोबार को इस बार संजीवनी मिलने की उम्मीद है। कुम्हार पिछले सालों की तुलना में इस बार ज्यादा बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा भी लोगों से मिट्टी के दीये एवं अन्य सजावटी सामान खरीदने की अपील की गयी है। प्रशासन ने मिट्टी की सामग्री बेचने वालों के लिए सहुलियतें और सुविधायें के साथ ही कोई भी कर नहीं वसूलने के निर्देश दिये हैं।

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