श्रीमद्भागवत कथा को मिला विराम,पुष्पों की होली के बाद भागवतमय औषधीय पौधों को घर ले गए श्रद्धालु



दिखावे से विरक्त रहने वालों को ही भगवान दिखते हैं- सुश्री जया किशोरी

श्रीकृष्ण जैसे सुंदर और आकर्षक ना कोई हुआ ना हुई-राजेश शर्मा



धमतरी। भगवान को आडंबर बिल्कुल भी नहीं भाता, ऐसे लोग जो दिखावे में जीते हैं उनको भगवान कभी भी दर्शन नहीं देते। इसलिए नकली भक्ति का ढोंग करने से अच्छा है कि असल में मन से ईश्वर से जुड़े, तब जाकर प्रभु दिखेंगे। ऐसा कहना था श्री रामलीला मैदान में श्रीमद् भागवत कथा सुना रहीं सुश्री जया किशोरी का। इस अवसर पर यजमान पं. राजेश शर्मा ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण जैसा सुंदर और आकर्षक ना किसी युग में कोई हुआ है और ना ही होगा। श्रद्धालुओं ने सातवें दिन की कथा में सुदामा चरित्र और कथा विराम के बाद पुष्पों की होली खेली।

श्रीमद्भागवत कथा के विराम दिवस पर पूजा अर्चना उपरांत यजमानों ने अपने अपने विचार रखें सर्वप्रथम गोविंद गांधी ने कहा कि कथा वाचिका सुश्री जया किशोरी की पूरे धमतरी को खूब याद आएगी। महेश शर्मा ने कहा कि लोगों का स्नेह इसी तरह मिलता रहा, तो धर्म रक्षक राजेश शर्मा के सहयोग से ऐसे धार्मिक कार्यक्रम होते रहेंगे। ओमप्रकाश शर्मा ने श्रोताओं को अच्छी उपस्थिति के लिए धन्यवाद दिया। युवा धर्म प्रेमी राहुल अग्रवाल ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण, सुश्री जया किशोरी और कथा कार्यक्रम के कार्यकर्ताओं के प्रति हम कृतज्ञता जाहिर करते हैं कि मेरे परिवार को इस लायक माना कि हम ऐसे धार्मिक कार्यक्रम संपन्न कराने के काबिल हैं। दिलीप राज सोनी ने कहा कि हमें पूज्य पाद शंकराचार्य  महाराज निश्चलानंद सरस्वती जी के आदेशों का पालन करते हुए सुसंस्कृत, सुरक्षित, सुशिक्षित और सुसंस्कारित सनातन धर्म की स्थापना को करोड़ों साल तक यथावत रखने के उद्देश्य से कृत संकल्पित रहना चाहिए। 

श्रीमद् भागवत कथा की रूपरेखा में अहम भूमिका निभाने वाले पंडित राजेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि आयोजक गण उन सब को साधुवाद प्रेषित करता है जिन्होंने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया। खासकर उन्होंने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी धन्यवाद दिया और कहा कि कथा स्थल पर मौजूद श्रोताओं  के अलावा लोगों ने कथा का लाभ आप लोगों के माध्यम से ही प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि सनातन शास्त्र के अनुसार पुण्य कर्मों का फल मनुष्य को अवश्य मिलता है। इसलिए श्रीमद् भागवत कथा का किसी न किसी रूप में हिस्सा बनना पुण्यकारी ही होता है। भगवान श्री कृष्ण को विश्व के अंतिम आकर्षण बताते हुए श्री शर्मा ने कहा कि नंद के लाला ही वास्तव में पूर्ण पुरुष थे और उनके जैसा आकर्षण और सौंदर्य आज तक किसी को भी न प्राप्त हुआ न प्राप्त होगा। संबोधन कार्यक्रम के बाद सुश्री जया किशोरी का कथा प्रवचन आरंभ हुआ श्रोताओं का होमवर्क टेस्ट करने के बाद उन्होंने "श्री वल्लभ विट्ठल गिरधारी, यमुना जी की बलिहारी" गीत से समा बांध दिया। 
सम्यंतक मणि का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे त्रेता युग के बाद द्वापर में जामवंत और भगवान श्रीराम की पुनः भेंट हुई। भगवान श्री कृष्ण की मूलतः 8 विवाहों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि भगवान ने किन-किन परिस्थितियों में माता रुक्मणी के बाद अतिरिक्त 7 पत्नियों को स्वीकारा। सुश्री जया किशोरी ने 16 हजार एक सौ आठ पटरानियों की कथा पर भी प्रकाश डाला। भगवान श्री कृष्ण के परम मित्रों में से एक सुदामा की दीनता के कारणों और निदान के लिए भगवान श्री कृष्ण के सानिध्य का बखूबी चित्रण किया गया। जरासंध के जन्म के रहस्य और वध का बखान करते हुए सुश्री जया किशोरी ने बताया कि भीम को भगवान पर भरोसा था इसलिए भरोसे की जीत हुई और जरासंध की हार। विघ्नसंतोषी लोगों को अपनी इस प्रवृत्ति को छोड़ने का आग्रह करते हुए सुश्री जया किशोरी ने कहा कि इंसान वही करता है, जो वह चाहता है। लेकिन होता वही है, जो भगवान चाहते हैं। जबकि लोग भगवान के चाहे अनुसार करने लगे तो इंसानों की चाहत, स्वयमेव पूर्ण होगी। कथा विराम के बाद पुष्पों की होली इस संदेश के साथ खेली गई कि भगवान द्वापर युग में भी जानते थे कि पृथ्वी का भविष्य अनेक प्रकार के प्रदूषण से भरा होगा और हमें इससे निजात पाने के लिए श्रीमद् भागवत कथा में बताएं के नुस्खों का उपयोग करना पड़ेगा। 

प्रसादी वितरण के बाद लोगों ने गिरिराज पर्वत पर उगाए गए औषधि और फलदार पौधों को घर ले जाना शुरू किया। जैसे-जैसे यह बात एक कान से दूसरे कान तक पहुंची। देखते ही देखते प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत के 35 सौ पौधे भागवत स्थल से लोगों के घरों तक पहुंच गए ।इस संबंध में सुश्री जया किशोरी ने पहले दिन ही कहा था कि जिन पौधों में भागवत का संस्कार होगा उन पौधों को घर में लगाना मतलब आसपास के वातावरण को भागवतमय पाना होगा। कथा विराम के दिन श्री रामलीला मैदान में मुख्य रूप से अशोक शर्मा, श्रीमती उषा शर्मा बिलासपुर, सुरेंद्र चंद व्यास , चौथमल व्यास, मंजू व्यास,  शशिकला व्यास अकोला, प्रकाश पुरोहित, ललिता पुरोहित, तारा पुरोहित गोंदिया, कविता खंडेलवाल, पूजा व्यास, पायल व्यास, मुन्ना शर्मा, अंकित अग्रवाल, सुभाष नाहर, गोपाल प्रसाद शर्मा, केशव प्रसाद शर्मा, पंडित राजेश शर्मा, जितेंद्र शर्मा, आरती शर्मा, नीतू शर्मा, मनोज शर्मा, सुनीता शर्मा ,नीलू शर्मा, हर्षद मेहता, मदनमोहन खंडेलवाल, पवन लुंकड़, दिलीपराज सोनी, योगेश गांधी, लीलाधर गांधी, ओमप्रकाश शर्मा, महेश शर्मा, बजरंग अग्रवाल, राधा अग्रवाल, भूषण शार्दुल, कीर्ति शार्दुल, विकास शर्मा, सन्नी मिश्रा, निलेश भारद्वाज, विजय साहू, शिवदत्त उपाध्याय, राहुल चोपड़ा, पंडित महेश शास्त्री, पंडित होमनप्रसाद शास्त्री, विनोद पांडे, आशीष थिटे, विक्रांत शर्मा, हेमलता शर्मा, मोनिका देवांगन, चंद्रिका साहू, नम्रतामाला पवार समेत हजारों की संख्या में श्रद्धालु गण उपस्थित थे।

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