जहाँ से बही महानदी उसी क्षेत्र में वैध रेत खदान नही,जनता उठा रही सवाल.....

 
आरती गुप्ता
नगरी।महानदी के उद्गम स्थल पर रेत खदान के आबंटन में शासन-प्रशासन की रुचि दिखाई नही पड़ रही इस मामले में शासन-प्रशासन को अपने रवैये में आमूल-चूक बदलाव करना होगा नही तो नियमो का उलंघन बढ़ता ही चला जाएगा और क्षेत्र की जनता का जेब खाली होगा।
 यू तो सिहावा क्षेत्र सप्त ऋषियों की तपो भूमि है और महानदी का उद्गम स्थल भी, सिहावा पर्वत से निकलकर यह जीवनदायनी बंगाल की खाड़ी तक पहुची है। देश के कई हिस्सो में इसी नदी पर रेत खदान आबंटित है परन्तु विडम्बना यह है कि उद्गम क्षेत्र ही इससे अछूता है। वरिष्ठ भाजपा नेता राजेन्द्र गोलछा का कहना है कि लोगो को शुलभता से रेत व मुरुम उपलब्ध हो शासन-प्रशासन व्यवस्था बनाये रेत व मुरुम खदान की व्यवस्था करे और नही करती है तो जैसा चल रहा है वैसे चलने दे इस पर नकेल ना कसे।
शासन-प्रशासन के रवैये ने सिहावा क्षेत्र के लोगो को परेशानी में डाल रखा है क्षेत्र में रेत खदान का आबंटन नही होना कई निर्माण कार्य मे परेशानी का सबब है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवास योजना हो या फिर निजी मकान पुल-पुलिया हो या शासकीय भवन रेत खदान आबंटन की दुहाई दे रहे है। शासन-प्रशासन का झटका, नियमो के उलंघन को बढ़ावा दे रहा है और शासन को हो रही लाखो रुपये की राजस्व हानि सरकारी नुमाइंदों को स्वीकार है। पूर्व नपं अध्यक्ष नंद यादव का कहना है कि नाली से लेकर ब्रिज बनाने तक रेत की आवश्यकता होती है। क्षेत्र में रेत व मुरुम खदान नही होने से काम कैसे होगा। लोग एक नंबर पर काम करने को तैयार है रॉयल्टी देने को तैयार है शासन-प्रशासन की गैर जिम्मेदाराना रवैये ने ही लोगो को नंबर दो का काम करने पर मजबूर कर दिया है। 
 
 क्षेत्र में सपनो का महल बनाना अब उतना आसान नही रह गया रेत की कमी लोगो के पसीने निकाल रही है दामों में हुई अचानक वृद्धि ने इन दिनों निर्माण कार्य मे रुकावट पैदा की हुई है। मूल कारण है संबधित विभाग की लापरवाही जो वर्षों बाद भी खदान आबंटित नही कर पाई है। पूर्व मंडल अध्यक्ष रवि दुबे कहते है मैं इनसे सवाल पूछना चाहता हु कि क्षेत्र में वैध खदान नही है तो अघोषित किसे माना जाय मातहतों द्वारा परिवहन कर रहे वाहनों पर चलानी कार्रवाही जनता को गुमराह कर रही है विभाग की लापरवाही का परिणाम क्षेत्र की भोली-भाली जनता भोग रही है। महज 700 से 800 रूं में मिलने वाली रेत का दाम आज चरम पर है पांच गुना दर पर 3500 से 4000 रू की लागत में रेत की उपलब्धता है। 
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में रेत व मुरूम खदान का आबंटन नही होना क्षेत्र की उपेक्षा को प्रदर्षित करता है जबकि इस क्षेत्र में पाचवी अनुसूची भी लागू है और शासन-प्रशासन में बैठे मातहत इसी क्षेत्र के भोली-भाली जनता को उल्लू बना रहे है। इस विषय पर युवा भाजपा नेता जनपद सदस्य मन्नू यादव का कहना है कि जानकारी के मुताबिक भीतररास, भुरसिडोगरी और डोमपदर ये तीन रेत खदान का आबंटन किया गया है परंतु लगभग 2 वर्षो के बाद भी इस पर कोई ठोस कार्रवाही नही की है जिससे क्षेत्र की जनता खासी नाराज है।
पूर्व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रवि ठाकुर का कहना है कि शासन प्रशासन को जल्द से जल्द खदान आबंटन करे ताकि शासन को राजस्व मिल सके और क्षेत्र की जनता को कम दर पर रेत उपलब्ध हो ।
 
हालांकि क्षेत्र की विधायक डॉ लक्ष्मी ध्रुव ने हाल ही हुए वीसी में जिला के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा के पास इस बाबत प्रमुखता से मांग रखी है लेकिन विश्वस्त सूत्रों के हवाले ये पता चला है कि क्षेत्र के अधिकारी इनके आदेश का माखौल उड़ाते अपनी मनमानी में लगे है। जिसके कारण शासन और प्रशासन में रेत परिवहन को लेकर तनातनी बनी हुई है जो कि क्षेत्र के विकास में अड़चनें पैदा कर सकती है। इस विषय मे क्षेत्र की विधायक लक्ष्मी ध्रुव का कहना है कि यह पाचवी अनुसूची का क्षेत्र है यहां के नागरिक धमतरी तक रेत लेने तो नही जाएंगे जबकि घर के किनारे नदिया बह रही है। प्रशासन शक्ति बरत रही है जिसके कारण शासकीय कामो में देर हो रही है जो न्याय संगत नही है। इस प्रकार से शासकीय कार्यो में बाधा नही डालनी चाहिए नही तो निर्माण कार्यो में विलंब होगा।
जनपद अध्यक्ष नगरी दिनेस्वरी नेताम का कहना है ट्राइबल क्षेत्र होने के नाते शासन-प्रशासन को इस क्षेत्र की चिंता करनी चाहिए हाल ही रेत खदान के निरीक्षण में पहुचे जिला पंचायत सदस्य एवं उनके सहयोगियों पर रेत माफिया के गुर्गों ने प्राणघातक हमला किया है जिसकी प्रदेश तक चर्चा है।हमारा क्षेत्र शांत है इसलिए क्षेत्र में रेत खदान का आबंटन महिला स्वसहायता समूहों को दिया जाए ताकि महिलाओं का उत्थान हो सके। रेत माफिया और दलालों को खदान का आबंटन ना हो शासन-प्रशसन को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि क्षेत्र की संप्रभुता कायम रहे।बता दे कि शासन ने 16 जून से प्रदेश के सभी रेत खदानों को बंद करने का आदेश जारी किया है आगामी आदेश में क्षेत्र के रेत खदान खुल जाए शासन-प्रशासन को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए।
 
खनिज अधिकारी सनत साहू ने कहा कि नगरी क्षेत्र के भीतररास, भुरसिडोगरी, और डोमपदर में रेत खदान का आबंटन है पर्यावरण विभाग में एनओसी के लिए आवेदन किया गया है विधायक मेडम ने इस विषय पर जिलाधीश महोदय से चर्चा की है मैं भी उनसे चर्चा कर कुछ समाधान निकालने का प्रयास करता हूं।

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