लेमनग्रास उत्पाद से महिलाओं में आयी आत्मनिर्भरता

 



 धमतरी  ग्राम पंचायत भटगांव की स्वसहायता समूह की महिलाओं ने लेमनग्रास की खेती कर न सिर्फ अपने आप कोे सशक्त बनाया है बल्कि गांव की तरक्की व जिले का नाम रोशन किया है।  जिला मुख्यालय से महज 06 किलोमीटर की दूरी में दक्षिण दिशा मेंग्राम पंचायत भटगांव स्थित है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना एवं 14वें वित्त आयोग से 02 लाख 20 हजार रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। सिंचाई व्यवस्था हेतु क्रेडा विभाग से पम्प कनेक्शन एवं तकनीकी मार्गदर्शन उद्यानिकी विभाग द्वारा दिया गया। ग्राम पंचायत भटगांव द्वारा लगभग 03 एकड़ बंजर भूमि में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के सहयोग से चारागाह विकसित किये जाने की कार्ययोजना तैयार कर कार्य को विस्तार दिया गया। वर्तमान में जय भवानी महिला स्वसहायता समूह द्वारा लेमनग्रास की खेती की जा रही है। पारंपरिक खेती नहीं होने से उक्त जमीन का कोई मोल नहीं था। लेकिन लेमनग्रास की खेती से आमदनी बढ़ाने के लिए समूह की महिलाएं नई तकनीक अपनाकर आगे बढ़ रहे हैं। इन्हीं तकनीक का नाम है लेमनग्रास की खेती। धीरे-धीरे लोगों का रूझान लेमनग्रास फसल की ओर बढ़ रहा है। इसकी खूबी यह है कि इसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी लगाकर अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं। यह बारहमासी मुनाफा देने वाली फसल है।



जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  नम्रता गांधी ने बताया कि-शासन के निर्देशानुसार गौठानों को आय से जोड़ने हेतु मल्टीयुटीलिटी सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। लेमनग्रास की खेती बहुद्देशीय रूप से किया जा रहा है। हरा लेमनग्रास प्रसंस्करण हेतु प्रसंस्करण उपरांत उपलब्ध लेमनग्रास को सूखे चारे के रूप में पशुओं के आहार हेतु उपयोग में लाया जा रहा है। तकनीकी रूप से किये गये कार्य में सफलता मिल रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, उद्यानिकी विभाग एवं 14वें वित्त आयोग के अभिसरण के तहत कार्य को निरंतर गति दी जा रही है। जय भवानी महिला स्वसहायता समूह भटगांव द्वारा लगभग 03 एकड़ की रिक्त पड़ी बंजर भूमि में लेमनग्रास की खेती करने की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। समूह की महिलाओं द्वारा 15 क्विंटल लेमनग्रास पत्ती निकालकर मल्टीयुटीलिटी सेंटर छाती में विक्रय किया गया जिससे 50 हजार रूपये की आमदनी हुई। ग्राम पंचायत सोरम को लेमनग्रास की खेती करने स्लीप निकालकर दिया गया इससे बाजार मूल्य के दर से 45 हजार रूपये की आमदनी हुई। वहीं स्थानीय व्यवसायी द्वारा 31 क्विंटल लेमनग्रास आइल निर्माण, परफ्यूम, साबुन या क्रीम हेतु क्रय किया गया। जिससे 10 लीटर आइल तैयार की गई। लेमनग्रास के आइल से फ्लेवर में स्फूर्ति आती है। लेमनग्रास की खासियत है कि नीबू की सुगंध वाली यह घास एंटीआॅक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेंट्री, एंटीसेप्टीक और विटामिन सी से भरपूर होने के कारण रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करती है। नीबू की सुगंध वाली लेमनग्रास का इस्तेमाल शासकीय दफ्तरों व गांवों में करने लगे हैं। इसका इस्तेमाल सूप बनाकर करने से कैंसर सहित कई बीमारियों से छुटकारा दिलाने में कारगर साबित हुई है। लेमनग्रास उत्पाद से महिलाओं को अच्छी खासी आमदनी होने से महिलाओं की उत्सुकता देखने को मिल रही है। आत्मनिर्भरता की ओर आसान्वित हैं। महिलाओं की दिलचस्पी देखते हुए लगभग 02 एकड़ भूमि में गिलोये, काली मिर्च, पुदीना, ऐलोविरा, तुलसी की औषधियुक्त खेती करने विस्तार की जा रही है।
 जय भवानी महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती किरण लता साहू ने बताया कि-कोरोना संक्रमण(कोविड-19) के दौरान इम्युनिटी बूस्टर के रूप में उत्पादित लेमनग्रास की पत्ती से मसाला तैयार कर शासकीय कार्यालय एवं जनसमूहों में विक्रय की गई जिससे समूह को अच्छी आमदनी हुई है। समूह के प्रति महिलाओं में विश्वास जगा है।


 
 

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