सोमवार को कुलेश्वरनाथ महादेव का किया फूलों से श्रृंगार

 



मगरलोड। राजिम माघी पुन्नी मेला के दसवें दिन सोमवार को विश्वप्रसिद्ध पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव शिवलिंग का फुलों से श्रृंगार किया गया। इससे इनकी मनमोहनी छवि भक्तों को काफी प्रभावित कर रही थी। सुबह से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा हुआ था। लोग अपने साथ नारियल, अगरबत्ती,धुप,कपूर,शक्कर, दुध-दही, सुगंधित तेल, सरसों तेल, विल्व पत्र आदि पूजन सामग्री चढ़ाकर प्रार्थना किये। 


बताया जाता है कि द्वादश ज्योतिर्लिंग है जिनमें सोमनाथ, मल्ल्किार्जुन,महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर,केदारेश्वर, भीमशंकर,विश्वेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर, घृष्णेश्वर है। इनके अलावा 108 दिव्यलिंगों का नाम वर्णित है। पूरे संसार में पंचमुखी महादेव के शिवलिंग विरले है। राजिम के त्रिवेणी संगम में इस शिवलिंग की स्थापना देवी सीता ने अपने करकमलों से किया था। रामायण काल में तीनों मूर्ति जिनमें रामचंद्र ने रामेश्वरम्, लक्ष्मण ने खरौद तथा सीता ने राजिम में शिवलिंग की स्थापना की। नीचे वेदी पर माँ पार्वती मौजूद है। गोलाकार आकृति में मंदिर के जगती तल का निर्माण हुआ है। लेख की पांचवी पंक्ति में संगम का उल्लेख मिलता है। इस मंदिर का निर्माण सातवीं-आठवीं शताब्दी माना गया है। 


मंदिर के पुजारियों ने बताया कि पूर्वकाल में शिवलिंग पर सिक्का डालने से ऊँ की ध्वनि सुनाई देती थी तथा फल-फूल,अक्षत् ,द्रव्य आदि अंदर से ही नदी में मिल जाती थी। लेकिन अब यह छिद्र बंद हो गया है। शिवलिंग के सामने नंदी महाराज पालथी मारकर बैठे हुए है। लोकधारणा है कि शिवजी से मांगी गई मन्नत नंदी के कान में जाकर कहने से पूरी होती है इसलिए श्रद्धालुगण नंदी के कान में अपनी बात जरूर फुसफुसाते है। नारद पुराण के अनुसार शिवलिंग की अर्धपरिक्रमा करने का विधान है।

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