गो काष्ठ वर्मी कम्पोस्ट विक्रय केंद्र का शुभारंभ किया,महापौर विजय देवांगन की धमतरी वासियों से होलिका में गौ-काष्ठ जलाने की अपील





  इतवारी बजार में निगम द्वारा बेचा जा रहा गो काष्ठ 5 रु प्रति नग

     


धमतरी।महापौर विजय देवांगन ने धमतरी वासियों से होलिका दहन में गौ-काष्ठ जलाने की अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए होलिका दहन में गौ-काष्ठ और कण्डे के उपयोग किया जाए।  इससे बड़ी संख्या में लकड़ी की बचत होगी।चूंकि होली जैसे पर्व में सर्वाधिक पेड़ों की कटाई होती है। जिससे पर्यावरण असंतुलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इकोफ्रेण्डली होली और गौ-काष्ठ का उपयोग बहुत बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों की कटाई पर अंकुश लगाने के साथ पर्यावरण के संतुलन को सतत् बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है।

     ऑक्सीजन का एकमात्र स्रोत वृक्ष है। इसलिए वृक्ष पर ही हमारा जीवन आश्रित है। यदि वृक्ष ही नहीं रहेंगे तो किसी भी जीव जंतु का अस्तित्व नहीं रहेगा। छत्तीसगढ़ की सरकार ने गौ- काष्ठ के इस्तेमाल को लेकर जो आदेश जारी किया है, वह आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।नगरीय निकाय क्षेत्रों में होने वाले दाह संस्कार और ठण्ड के दिनों में जलाए जाने वाले अलाव में लकड़ी की जगह गोबर से बने गौ-काष्ठ और कण्डे के उपयोग को जरूरी किया जाना सरकार के दूरदर्शी सोच का हिस्सा है। 


अब होली जैसे पर्व में यदि पेड़ों की कटाई को रोकने की दिशा में गौ-काष्ठ और गोबर के कण्डे का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा तो निश्चित ही यह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकार, की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।एक अनुमान के अनुसार होली जैसे पर्व में एक होली के पीछे दो से तीन क्विंटल लकड़ियां जला दी जाती है। शहरों सहित कई इलाकों में होलिका दहन की औपचारिकता की खातिर आस-पास के हरे-भरे पेड़ काट दिए जाते हैं और पुराने टायरों को भी आग में झोंक दिया जाता है। शहरों में बनने वाली होली की संख्या ही बहुत अधिक होती है। सामूहिक के अलावा अनेक लोग अपने घरों के आसपास होलिका जलाते हैं। 

     होली को इको फ्रेण्डली बनाने की दिशा में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पिछले साल भी इकोफ्रेण्डली होली जलाई गई थी और दाह संस्कार में गौ-काष्ठ सहित गोबर के कण्डे का लगातार उपयोग किया जा रहा है। गौ-काष्ठ से होलिका दहन, बहुत आसान और पर्यावरण के लिए उपयोगी है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी धारणाएं बदलनी होगी ताकि हम शुद्ध हवा में सांस ले सके।

    


            गौ काष्ठ और गोबर के कण्डे को होलिका दहन में अपनाकर ग्रीन तथा क्लीन धमतरी के कान्सेप्ट को भी सफल बना सकते हैं। हमारे इस प्रयास से ऑक्सीजन, औषधि देने वाले, मृदा संरक्षण करने वाले, पक्षियों के बैठने की व्यवस्था, कीडे़-मकोड़े, मधुमक्खी के छत्ते से वातावरण को अनुकूलन बनाने वाले वृक्षों के साथ पशु-पक्षियों को भी संरक्षण मिलेगा और हम सभी एक महान कार्य का हिस्सा भी बन सकते हैं।

इस मौके पर आयुक्त मनीष मिश्रा,एमआईसी मेंबर राजेश पांडेय,आवेश हाशमी केंद्र कुमार पेंदरिया, पार्षद दीपक सोनकर,सोमेश मिश्राम ,सूरज गहेरवाल,कार्यपालन अभियंता राजेश पदमवार ,उप अभिंयता कामता नागेंद्र एवं निगम के  अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।



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