राजयोगिनी दादी हृदयमोहनी का देहावसान,श्रद्धांजलि देते हुए CM बघेल बोले- महाशिवरात्रि के दिन कैलाशवासिनी हो गई दादी

 


वतन जायसवाल

रायपुर। प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय संस्था की प्रशासिका राजयोगिनी दादी हृदयमोहनी का 11 मार्च को निधन हो गया। साल भर पूर्व उन्होंने राजयोगिनी दादी जानकी के देहावसान के संस्थान की मुख्य प्रशासिका का दायित्व संभाला था। उनके निधन पर राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।


प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी हृदयमोहनी ने आज अंतिम सांस ली। 9 वर्ष की आयु में ही वो संस्थान में आई थी और तब से आज तक संस्था से जुड़ी हैं। जन्म 1 जुलाई, 1926 हैदराबाद पाकिस्तान के सिंध में हुआ था। आपके बचपन का नाम शोभा था परन्तु संस्थान में आने के बाद प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने इनका नाम गुलजार रखा। लेकिन जब ईश्वरीय अवतरण प्रारम्भ हुआ तो नाम दादी ह्दयमोहिनी पड़ा। ओम मंडली के प्रारम्भ से ही संस्थान से जुड़ी रही और बाद में अपना सबकुछ सर्वस्व समपर्ण कर दिया।

दादी हृदयमोहिनी ने माउण्ट आबू आने से पहले यूपी के लखनउ तथा दिल्ली में भी ईश्वरीय सेवायें करती रही हैं। बताया जाता है दिव्य दृष्टि का वरदान प्राप्त था। जिससे वे ईश्वरीय संवाहक तथा परमात्म मिलन भी कराती रही है। इनके शरीर के माध्यम से ही परमात्म शिव का मिलन होता रहा है। इन्हें संदेशी भी कहा जाता है। 

दादी हृदयमोहिनी राजयोगिनी दादी हृदयमोहनी के निधन पर राज्यपाल अनुसुईया उइके ने ट्वीट कर के अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दादी को नमन करते हुए ट्वीट किया कि दादी का जाना दुखद है। महाशिवरात्रि के दिन वे कैलाशवासिनी हो गई।

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