नवागांव ऐनीकट में पानी नहीं होने से मैदान में तब्दील,राजिम मेला के लिए छोड़ा गया पानी महाशिवरात्रि के बाद भी लगातार बहता गया

 


अधिकारियों की अनदेखी के कारण एनीकट में अब पानी नहीं



पवन निषाद

मगरलोड( धमतरी )।त्रिवेणी संगम से लगा हुआ नवागांव (बुडेनी) ऐनीकट पिछले वर्ष इस समय लबालब पानी से भरा हुआ था। लेकिन इस बार अधिकारियों की लापरवाही एवं अनदेखी के चलते धीरे धीरे मैदान में तब्दील होता जा रहा है ।सिर्फ जहां गड्ढे है वही पानी बचा हुआ है बाकी जगह सूखा रेत व घास ही दिखाई दे रहे है। 27 फरवरी से राजिम माघी पुन्नी मेला शुरू हुआ जो लगातार 11 मार्च तक चला। महाशिवरात्रि को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य स्नान भी किया उस समय इसी एनीकट से पानी की सप्लाई हुआ था। महाशिवरात्रि के बाद भी लगातार दो गेट खुलने के कारण लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहता गया लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया। अब स्थिति यह बन गई है कि इस मिनी जलाशय में पानी ही नहीं है जो बचा हुआ है वह गड्ढे में ही एकत्रित है। 


उल्लेखनीय है कि जल संसाधन विभाग धमतरी के देखरेख में इस एनीकट का निर्माण करोड़ों रुपया खर्चा कर किया गया। गर्मी के दिनों में पानी की कमी ना हो और साथ ही त्रिवेणी संगम को भी पानी मिलता रहे इसलिए राज्य सरकार ने यहां की स्थिति से वाकिफ होकर तत्काल राशि स्वीकृत किया। ताकि 12 महीना वाटर लेवल भी बना रहे। सन् 2015-2016 में ऐनीकट तो बन गया। अस्तित्व में आने के बाद ऐनीकट के गेट को बंद किया गया। जिससे नदी में सब्जी बाड़ी फसल लगाए हुए किसानों की बाड़ी डूब गई थी और उन्हें लाखों रुपया का नुकसान उठाना पड़ा था। उनकी गाढ़ी कमाई पानी के साथ ही डूब गई। किसानों ने एक शिकायत भी नहीं किया। लेकिन उसके दूसरे साल ऐनीकट सूखा ही रहा।


 तीसरे साल भी सुखा रहा। चौथे साल पानी से लबालब भरा रहा। इसे देखकर ना सिर्फ किसान बल्कि रहवासी भी खुश हो गए कि अब ग्रीष्मकाल में निस्तारी की समस्या नहीं रहेगी। परंतु इस बार वही सूखे वाली स्थिति देखने से करीब तीन दर्जन गांव के वाटर लेवल तेजी के साथ नीचे चला गया है। ज्ञातव्य हो कि रायपुर जिले के नवापारा शहर, गरियाबंद जिले के राजिम शहर,धमतरी जिले के अनेक छोटे बड़े गांव के अलावा लगभग तीनों जिला के कई गांव को इस एनीकट में पानी नहीं रहने के कारण  किल्लत उठानी पड़ रही है। यह भी जानना जरूरी है कि पानी को सुरक्षित रखने के लिए सोंढूर,पैरी नदी पर तटबंध करोड़ों रुपया खर्चा कर बनाए गए है। जो सीधा एनीकट से चौबेबांधा राजिम परसवानी पुल को स्पर्श करती है। इसकी जल भराव क्षमता चौबेबांधा, नवागांव,बुडेनी,भेंडरी,बरोडा,सिंधौरी तक होती है जिससे अनेक गांव लाभान्वित होते हैं। अब यहां पानी बमुश्किल जहां गड्ढे दिखाई दे रहे हैं मात्र वहीं है। बाकी जगह सुख चुके है। खुद ऐनीकट के गेट के पास मिट्टी दिख रहे है अब इसमें पानी ही नहीं है।


इस बार भीषण गर्मी पड़ने वाली है।अप्रैल के शुरुआती महीने में ही मई - जून की गर्मी अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया है। सुबह 8 बजे से ही सूर्य देव अपने रौद्र रूप में आ जाते हैं जो शाम को 5 बजे तक तेज धूप से लोग बेहाल हो गए है ऐसे में नदी किनारे पानी वाले स्थान पर लोग जाना पसंद करते हैं। अभी से पारा चढ़ा हुआ है तो मई-जून में क्या स्थिति बनेगी यह सोचनीय विषय बन गया है।प्रयाग नगरी राजिम में तीन नदियों का संगम है जहां स्नान, दान, पिंड दान, अस्थि विसर्जन आदि के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में देश भर से लोग आते हैं। वर्तमान में संगम में कहीं कहीं पर पानी है यह सप्ताह भर के अंदर में सूख जाने का अंदेशा है इसके बाद लोगों को सुखी रेत में ही धार्मिक कृत्य करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यदि ऐनीकट में पानी रहता तो साल भर लोगों को पानी मिलता लेकिन इस बार तो पानी को व्यर्थ बहा दिया गया है। जिसका खामियाजा राह वासियों को भुगतना पड़ रहा है। नगर के अनेक लोगों ने नवागांव ऐनीकट के अलावा राजिम एनीकट को पानी से लबालब भरने की मांग वर्षों से करते आ रहे हैं। किंतु इस दिशा में अभी तक नहीं किसी जनप्रतिनिधि ने ध्यान दिया और ना ही प्रशासन के अधिकारियों ने चिंता की है।


नहाने के लिए भी ऐनीकट में अब पानी नहीं है। जो बचा हुआ है वह गंदा है। नदी में रेत के बदले मिट्टी की परत भी जम गए हैं पांव रखते ही मिट्टी के कण फैल जाते है जिससे स्नान करने में असुविधा हो रही है। पानी नहीं होने के कारण अब सिर्फ तलाब व नालों के पानी पर ही आश्रित होना पड़ रहा है।इस सम्बंध में जल संसधान विभाग धमतरी के ईई एके पलड़िया से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन सम्पर्क नहीं हो पाया।

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