भूपेंद्र साहू
धमतरी
उप जेल में बंद धारा 307 का आरोपी विचाराधीन बंदी इतवारी साहू आखिर क्यों
दीवार फांद कर भागना चाहता था?क्यों अपनी किस्मत पर वह रोने लगा?कुंठित भाव
से जेल में रहते हुए आखिर उसके मन में क्या विचार आते हैं?इन सब बातों को
उसने अपनी ही जुबानी कही। इतवारी सिंह ने बताया कि कुछ सोच समझ कर जेल से
फरार होने की कोशिश की थी। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया वरना आज वह बंगाल
पहुंच गया होता ।अपने आप को हुनरमंद बताने वाला विचाराधीन बंदी जेल के
अंदर कुंठित हो चुका है ।उसके मन में ख्याल आया कि वह इतना टैलेंटेड होने
के बाद भी आज इस जेल के अंदर पड़ा हुआ है। क्यों ना बाहर जाकर अपने टैलेंट
का उपयोग करें ।इसी उधेड़बुन में उसे 18 जुलाई को मौका मिला जब जेल की
सुरक्षा को सेंध लगाते हुए 25 फीट ऊंची दीवार को फांद कर कूद पड़ा ।उसने
बताया कि 18 जुलाई को अन्य बैरक की कैदियों को साफ सफाई के लिए लाया गया था
इसी दौरान वह चुपके से शामिल हो गया। वापस लौटते वक्त निर्माणाधीन बैरक की
ओर जाकर छुप गया और वहां रखे रस्सी और बांस से बमुश्किल 10 मिनट में सीढ़ी
बनाकर तत्परता से ऊपर चढ़ गया ।उस पर प्रहृयूओ की नजर नहीं पड़ रही थी
।जैसे ही वह ऊपर पहुंचा जेल के पीछे हिस्से में लगे बठेना स्कूल के बच्चे
चिल्लाने लगे जिसे इशारे से चुप भी कराता रहा ।चिल्लाने की वजह से वह इतनी
ऊंचाई से कूद गया कि नीचे पैर में फ्रेक्चर हो गया। कुछ देर तक खेत में छुप
रहा,लेकिन दर्द इतनी बढ़ने लगी कि उसके हौसले पस्त हो गए और आखिरकार उसने
सोच लिया कि अब मुझे वापस जेल के अंदर ही जाना है ।उसने बताया कि घटना लगभग
11 बजे के आसपास की है ।खेत में रहने के बाद धीरे-धीरे रेंगते हुए
सेहराडबरी नेशनल हाईवे की ओर जाने लगा ।इसी दौरान अर्जुनी पुलिस की नजर
पड़ी और गिरफ्तार कर लिया गया ।बचपन से ही हार्वेस्टर मैकेनिक का काम करता
है। आगे जाकर कुछ अच्छा काम करता ,लेकिन किस्मत दगा दे गई ।
उसने कानून
तोड़ने की कोशिश की और जेल से दीवार फांद कर भागने का दुस्साहस किया जो कि
पूर्णतः गलत था। जेल से बाहर छूटने के बाद वह सादगी पूर्ण जीवन जीकर एक
बेहतर काम भी कर सकता था ।उल्लेखनीय है कि इतवारी ने जेल की सुरक्षा में
सेंध लगाते हुए 18 जुलाई को दीवार फांद कर भागने की कोशिश की थी और इस
मामले में तीन प्रहरियों को निलंबित भी कर दिया गया है। अब उच्च अधिकारियों
के निरीक्षण के बाद जेल में सुरक्षा बढ़ाए जा रहे हैं।


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