जिंदगी से पूछेंगे,,



कभी मिली जो जिंदगी तो पूछेंगे हम.
सब कुछ है पर सुकून क्यों है कम.

खोई है हंसी कहीं पर.
और आंसुओं में है दम.

ना बताती मौत कितनी ना बताती जिंदगी है कितनी कम.

हालातों से लड़ते-लड़ते हमारी आंखें रहती नम.

लाख रोके कोई कदमों को मेरे.
फिर भी हौसलों में है दम.

यूं ही बढ़ते जाएंगे हम अब.
ना रुकेंगे हमारे अब कदम.

लंबा हो चाहे कितना भी रास्ता.
मंजिल तक पहुंच कर दिखाएंगे हम.

























वंदना पांडे मिश्रा 
कानपुर उत्तर प्रदेश

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