VDO:ग्रामीणों की आस्था से जुड़ा एक रहस्यमई तालाब...


 

 प्राचीन तालाब बनवास कुवंर नारधा 


 पवन निषाद
मगरलोड़।  सनातन काल से चली आ रही हमारी प्रचीन मान्यताए और आस्था आज भी हमारे प्राचीन क्षेत्रो मे विधमान हैं। एक ऐसा तालाब जहा महिलाए स्नान नही करती तालाब मे शौच मुक्त एवं अशुद्धियां पुर्णतः वर्जित है। गांव के लोग करते है इस तालाब की पूजा..

ऐसी ही प्रचीन मान्यताओ एवं आस्था का केन्द्र धमतरी जिले के मगरलोड ब्लाक में स्थित प्रचीन तालाब जो कि स्थित। यह तालाब बनवास कुंवर मंदिर ग्राम नारधा में हैं। यह ग्राम पैरी नदी के पावन पश्चिमी तट में मगरलोड विकास खण्ड धमतरी जिला के आखरी बाॅडर पर स्थित है। लगभग 850 कि जनसंख्या एवं 1000 एकड रकबा वाला यह ग्राम डुमरपाली ग्राम पंचायत का आश्रित ग्राम हैं। यहा पर मुख्यतः साहू और निषाद जाति लोगो की बहुल्यता हैं।
 इनका मुख्य व्यवसाय कृषि उत्पादन करना है। यहा के लोग सौम्य सरल स्वभाव व प्रपंचो से दूर है । ग्राम नारधा आज इतिहास के पन्नो में लिखने के लिए महत्वपुर्ण हो गया हैं। क्योकि यहा का एक होनहार नौंजवान ललित दिवान बस्तर के मर्दापाल थानातर्गत कुदुर पहाडीं पर नक्सलीयो व्दारा किये गए हमले में शहीद होकर अमर हो गया। इसी महान धरा में आज भी विधमान हैं। प्राचीन बनवास कुंवर तालाब और मंदिर जो निश्चित आश्चर्यजनक हैं। 
बता दे की यहां के ग्रामीण रामशरण साहू 55 वर्षीय बुजुर्ग से प्राप्त जानकारी के अनुसार यहा का एक तालाब और मंदिर बहुत ही ऐतिहासीक महत्व का रहस्यमय तालाब है। इस तालाब का मालगुजारी शासन काल में निर्माण कराया गया था। वहीं यहां के लोगों ने बताया कि यह तालाब अनुमानित 165 वर्ष पुराना है।
                              
 बाइट... रामशरण साहू... ग्रामीण नारधा..
ग्रामिणो के कथनानुसार उन्हें पुर्वजो ने बताया है कि यहां कोई बालब्रम्हाचारी तपस्वी ने इस जगह पर आ कर तपस्या कि थी। उसी कि स्मृती मे उसके तपस्या स्थल के पास प्राचीन डबरीनुमा तालाब मालगुजारी शासन में बनाया गया था। वह आज बार बार गहरीकरण करनें से कुछ बडा आकार हो गया हैं इस तालब के तट में बालब्रम्हाचारी का पत्थरों सें बना पुजा स्थल हैं वहा पर उनके आज भी दो खडाउ रखें हुए है। वहीं 16 वर्ष पूर्व तपस्वी के बालब्रम्हाचारी के स्वरूपानुसार बनवास कुंवर नाम सें मुर्ति स्थापित कर दी गई...जहा पर मंदिर बनाया गया हैं। वहीं इस मुर्ति कि स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा स्वर्गीय सिया भुनेश्वरी शरण व्यास सिरकटटी आश्रम के व्दारा किया गया था । 

बाइट.. परदेसीराम निषाद,ग्रामीण नारधा
                 

बनवास कुंवर तालाब कि प्राचीन मन्यता एवं आस्था पर विश्वास रखने वाले ग्रामीणो का आज भी कहना हैं कि इसमे कोई भी मासिक धर्म प्रारंभ हो चुकी लडकी या महिलाये स्नान नही करती केवल कुंवारी कन्या एवं पुरुष लोग स्नान करते हैं। साथ ही साथ इस तालाब के अंदर कोई भी मनुष्य शौच या किसी भी प्रकार कि गंदगी नही करतें यहा तक शौच के लिये इसके पानी का भी उपयोग नही करते। वहीं ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि अगर कोई घर कार्य के लिए पानी की जरूरत होती है तो पुरुष ही तालाब से पानी निकाल कर देते है।
बाइट.... दामिनी साहू, ग्रामीण महिला नारधा

यहा के ग्रामीणो का कहना है कि लोग जानबुझकर तालाब मे शौच एवं अशुद्ध करने का प्रयास करते हैं तों उन्हे दुष्परिणाम भुगतना पडता हैं। अगर कोई अंजाने या भूलवश अशुद्धि कर जाते हैं तो उसें ब्रम्हाचारी जी क्षमा कर देते हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस तालाब में जानबुझकर कर अशुद्धि करने वालों को प्रकोप या कुछ अनहोनी की भी आशंका होती है। वहीं इस तालाब का गहरीकरण किया जाता हैं तो तालाब मे पुजा अर्चना के बाद ही कार्य प्रारंभ किया जाता हैं, उसी प्रकार पानी भरने से पूर्व भी हवन पुजन किया जाता हैं। वही बरसो पुरानी इस ग्राम कि नाटक मंडली आज भी बनवास कुंवर मंडली के नाम से संचालित हैं। यहा के लोगो का कहना है की जो भी कार्य सिध्द करने मन्नत मांगते है वह पूरा कार्य पूरा जरूर होता है। 
          इस तरह ग्राम नारधा का बनवास कुंवर मंदिर एवं  तालाब बहुत ही प्राचीन मन्यताओ एवं आस्था के लिए प्रसिध्द स्थल हैं।

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