कोरोना से ठीक हुये कुछ मरीजों में शारीरिक कमजोरी, दिल की धड़कन बढ़ने व श्वास लेने जैसी समस्या बरकरार

 



इन्दौर।   कोविड 19 संक्रमण संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है साथ ही स्वास्थ्य दर भी अच्छा है, जिससे जन-जीवन सामान्य की ओर अग्रसर हो शहर, प्रदेश व देश पुनः विकास की राह पर शनैः-शनैः अग्रसर हो चले हैं। कुछ ऐसे ही मुद्दे को लेकर एसकेआरपी गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल काॅलेज के विषय विशेषज्ञों द्वारा महाविद्यालय परिसर में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ एस एन त्रिपाठी प्रोफेसर शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल थे।

सेमिनार को सम्बोधित करते हुये आयुष मन्त्रालय, भारत सरकार में वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य डाॅ. ए. के. द्विवेदी ने कहा कि, होम्योपैथीक चिकित्सा का मतलब केवल आर्सेनिक एल्बम के आधार पर होम्योपैथिक चिकित्सक होम्योपैथिक दवाईयों का चयन कर सकता है। बताया कि कोरोना ने बहुत कुछ सिखाया जीवन जीने की कला सिखा दिया पहले के लोग घर के अन्दर जाने से पूर्व पैर धोकर ही अन्दर प्रवेश किया करते थे आज पुनः उसी परम्परा की ओर लोग बढ़ने लगे हैं। चावल दाल का महत्व समझा दिया जो लोग पिज्जा बर्गर खाते थे होटल जाते थे घर के खाने पर निर्भर रहने लगे। स्व का मह्त्व समझा दिया खुद को स्वस्थ रखना सबसे ज्यादा जरुरी है। एक निश्चित दूरी का पालन करना भी जरूरी है। हाथ मिलाने के बजाये नमस्ते करना सीखा गया भारतीय चिकित्सा पद्धति एवं होम्योपैथी के प्रति पूरे विश्व में सम्मान दिला गया। समग्र चिकित्सा की बात आने लगी ऐसी बीमारी जिसका निदान किसी एक चिकित्सा प्रणाली के द्वारा सम्भव नहीं उसमें सभी चिकित्सा प्रणाली के विषय विशेषज्ञों की राय के लिए टास्क फोर्स बनाने की आवश्यकता। कोविड संक्रमित मरीज ठीक तो हो चुके हैं बावजूद इसके कुछ रोगियों में शारीरिक कमजोरी, दिल की धड़कन बढ़ना, श्वास लेने की तकलीफ जैसी शिकायत आ रही है। ऐसे रोगियों के लिये पृथक कोरोना फाॅलोअप की शुरूआत करनी होगी, जिसमें कोविड संक्रमण से ठीक हुये रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाय। ऐसे रोगियों की एक ही जगह जाँच करके उन्हें व्यवस्थित तरीके से सही निदान हेतु विशेषज्ञ चिकित्सकों की तरफ भेजा जाय, ताकि समस्या बढ़े, उसके पहले उनके समुचित इलाज की व्यवस्था की जाय।

सेमिनार में महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. एस.पी.सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये। डॉ सिंह ने कहा कि जो ज्यादा डरते है उनकी इम्युनिटी कमजोर हो जाती है स्ट्रेस एंग्जायटी हमारे मानसिक और शारीरिक ब्याधियो के लिए जिम्मेदार हैं।

डाॅ. एस.पी.सिंह ने कहा कि- श्वेत रक्त कोशिकाएं यानी व्हाइट ब्लड सेल्स आपके शरीर को सामान्य संक्रमणों और बीमारियों से बचाने के लिए जानी जाती हैं लेकिन शरीर खुद इनका उत्पादन नहीं कर पाता है विटामिन सी को सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कारगर माना जाता है विटामिन सी का सेवन बढ़ाने के लिए रोजाना खट्टे फल जैसे संतरे और अंगूर का सेवन करें यह नेचुरल तरीका आपकी इम्यूनिटी बढ़ाने में ममद करेगा।हरे रंग की सब्जी में विटामिन-सी विटामिन-ई और बहुत सारे फाइबर होते हैं। यह एंटीऑक्सिडेंट यौगिकों में भी समृद्ध होती है। ये सभी गुण ब्रोकोली को प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए एक महान भोजन बनाते हैं अगर आप भी नेचुरल तरीके से इम्यूनिटी पावर बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना ब्रोकली का सेवन करें।

महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक डॉ अंजलि निगम डॉ चेतना शाह डॉ सरिता जैन डॉ नवनीत सिंह  डॉ दीपाली सोनी, डाॅ. मनोज बगुल, रीडर डाॅ. अनुपम. श्रीवास्तव, डाॅ. कुशल परख, इन्टर्नी डाॅ. यशवन्त भाटी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नेहा जैन ने व आभार डॉ मुनीरा नकी ने व्यक्त किया


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