मिसाल बनी ’बैंक सखी’ पूर्णिमा साहू

 

सर्वाधिक ट्रांजेक्शन कर राज्य भर में पहले स्थान पर 

mti news team

धमतरी,बैंक सखी के रूप में सर्वाधिक ट्रांजेक्शन कर पूरे राज्य में पहले स्थान पर रहने वाली श्रीमती पूर्णिमा साहू आज ना केवल नगरी ब्लाॅक अथवा धमतरी जिला, बल्कि पूरे राज्य की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन गईं हैं, जो कि घर की चारदीवारी से निकल बाहर काम करने जाती हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन ’बिहान’ के तहत् गठित ’नई किरण महिला स्व सहायता समूह’ के अध्यक्ष के रूप में काम करने वाली 36 वर्षीय श्रीमती पूर्णिमा साहू वनांचल नगरी के डोंगरडुला की रहने वाली हैं। वर्ष 2017 तक जो महिला कामकाज के लिए घर से बाहर नहीं निकलीं, आज वे बैंक सखी के रूप में माईक्रो ए.टी.एम के जरिए घर-घर पहुंचकर लोगों को सेवाएं दे रही हैं।
वे बताती हैं कि उनके द्वारा माइक्रो ए.टी.एम. में हितग्राही का आधार कार्ड और खाता नंबर दर्ज कर पूरी पारदर्शिता के साथ बैंकिंग सेवाएं दी जा रही है। इनमें धान, तेंदूपत्ता बोनस वितरण, मनरेगा मजदूरी भुगतान, फसल बीमा, प्रधानमंत्री आवास के किश्तों का भुगतान, विद्यार्थियों का स्काॅलरशिप, विभिन्न योजनाओं के पेंशन वितरण इत्यादि शामिल हैं। उनके द्वारा अब तक छः करोड़ रूपए से अधिक का ट्रांजेक्शन कर लिया गया है। इसके अलावा एक माह में सर्वाधिक 43 लाख रूपए तक का ट्रांजेक्शन भी उन्होंने किया है। गौरतलब है कि उनकी मेहनत और लगन की वजह से वे लगातार राज्य में सर्वाधिक ट्रांजेक्शन करने वाली बैंक सखी के रूप में उभरी हैं। इसके एवज में उन्हें कमीशन के रूप में 15 हजार रूपए तक आय भी हुई है।
माइक्रो ए.टी.एम. का सबसे अधिक उपयोग उन क्षेत्रों में किया जाता है, जो शहर से काफी दूर है और जहां बैंक अथवा ए.टी.एम. लगाने की सुविधा नहीं है। इस व्यवस्था के पहले बैकिंग सेवाओं के लिए हितग्राहियों को बैंकों तक पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता था, किन्तु बैंक सखियों के जरिए यह सेवाएं देना आसान हो गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विजय दयाराम के. ने बताया कि जिले में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ’बिहान’ के माध्यम से बैंक सखी के रूप में महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में बैकिंग सुविधाएं मुहैय्या कराने में काफी आसानी हुई है। चलित माइक्रो ए.टी.एम. के जरिए अब पेंशन वितरण, मजदूरी भुगतान, मनी ट्रांसफर जैसे काम बहुत आसान हो गए हैं। देखने वाली बात है कि जिले में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अब तक कुल 47 महिलाओं को बैंक सखी के रूप में नियुक्त किया गया है। इससे ना केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, अपितु ग्रामीणों को भी बैकिंग सुविधाएं बिना वक्त गंवाए मिल रही है।
                                                

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