अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर ऐतिहासिक होने के साथ हिंदू धर्म का बड़ा केंद्र होगा



राम मंदिर ट्रस्ट में ब्रज के संतों को मिले सम्मान



प्रमेंद्र अस्थाना
लखनऊ। धर्म रक्षा संघ के तत्वावधान में मथुरा जिले के वृंदावन में कालीदह स्थित अखंड दया धाम में धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें संतों व धर्माचार्यों द्वारा केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री साध्वी निरंजना ज्योति की उपस्थिति में राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट में धर्मनगरी के संत व धर्माचार्यों को शामिल करने समेत आठ प्रस्ताव पारित किए गए।
मुख्य अतिथि केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री साध्वी निरंजना ज्योति ने कहा कि संत जन एवं धर्माचार्यों द्वारा धर्मसभा में जो प्रस्ताव रखे गए हैं। उनको वह अपनी सरकार के समक्ष रखेंगी और वृंदावन के संतों के प्रस्तावों पर न्योयाचित कार्रवाई कराने का हर संभव प्रयास करेंगी। अध्यक्षता करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने हिंदुओं की आस्था, भावना और श्रद्धा को न्याय देकर मंदिर निर्माण का आदेश दिया है। जो जल्द ही भव्य रूप में बनकर तैयार होगा। बाबा बलरामदास देवाचार्य ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन की भूमिका वीतराग संत स्वामी वामदेव महाराज के नेतृत्व में वृंदावन के साधु-संतों द्वारा बनाई गई थी। लेकिन आज जब राम मंदिर निर्माण का मार्ग सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशस्त हो गया है। तब स्वामी वामदेव एवं वृंदावन के अन्य संतों के योगदान की कोई चर्चा न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। स्वामी गोविंदानंद तीर्थ ने कहा कि देश के बड़े-बड़े धार्मिक आंदोलनों का नेतृत्व वृंदावन के संतों द्वारा हमेशा से किया जाता रहा है, जिसके प्रमुख स्तंभ स्वामी करपात्री महाराज, प्रभुदत्त ब्रह्मचारी और स्वामी वामदेव जैसे संत रहे हैं। महामंडलेश्वर स्वामी चित्प्रकाशानंद ने कहा कि अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर ऐतिहासिक होने के साथ हमारे हिंदू धर्म का बड़ा केंद्र होगा।
बलराम देवाचार्य महाराज ने राम मंदिर आंदोलन में स्वामी वामदेव महाराज व वृंदावन के अन्य संतों के योगदान का स्मरण किया। स्वामी गोविंदानंद तीर्थ, स्वामी चित्प्रकाशानंद महाराज ने मंदिर निर्माण में वृंदावन के संत समाज को भी प्रतिनिधित्व देने की भी मांग की। महंत मोहिनी बिहारी शरण ने प्रस्तावित मंदिर में स्वामी वामदेव की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। मृदुलकांत शास्त्री, आचार्य बद्रीश, सौरभ गौड़, स्वामी सुरेशानंद, श्रीदास प्रजापति, रामकमल दास वेदांती, स्वामी आदित्यानंद महाराज, रामविलास चतुर्वेदी आदि संत व विद्वतजनों ने विचार व्यक्त किए।

धर्मसभा में   जगद्गुरु अनंतानंद द्वाराचार्य रामकमल दास वेदांती, महंत मोहिनीबिहारी शरण, महंत प्रहलाद दास, महंत सुतीक्षण दास, महंत ब्रजबिहारी दास, श्यामसुंदर गौतम, गोपेश गोस्वामी, श्रीकृष्ण सरस, राजकुमार शर्मा, स्वामी नवल गिरि, सच्चिदानंद दास, विजय गिरि, स्वामी ब्रह्मचैतन्य, नारायण दास, राघवेंद्र दास, संतोष पुजारी, रामभरत दास, उपदेशदास उदासीन, स्वामी सेवानंद ब्रह्मचारी, स्वामी कृष्णचैतन्य, स्वामी वैष्णवदास, स्वामी रामप्रकाश, महंत चंद्रदास, स्वामी कृष्णानंद सरस्वती, विमल चैतन्य, आनंदवल्लभ गोस्वामी, मदनगोपाल बनर्जी, जगदीश चौधरी आदि मौजूद रहे ।



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