4 महीने की नींद के बाद सुबह जागते हैं भगवान विष्णु, शाम को गोधुलि वेला में तुलसी विवाह



धमतरी। बुधवार 25 नवंबर को धमतरी अंचल में देवउठनी पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हालांकि कुछ गांव में गुरुवार को भी मनाया जाएगा। बाजार में रौनकता नजर आई। गन्ना 40 से 80रु जोड़ी तक बिका।दुर्ग ,भिलाई, अंबिकापुर, राजिम, बालोद, धमतरी से गन्ना पहुंचा था।पूजा के सामान भाजी, सिंघाड़ा,लाई बताशा की बिक्री जमकर हुई।


इस दिन रंगोली बनाने और दीपक लगाने के साथ ही तुलसी दान करने की भी परंपरा है।दीपावली जैसे ही मनाया जाता है ये पर्व, इस दिन विष्णुजी के साथ  लक्ष्मीजी की पूजा की जाती है।25 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी है। पद्म और विष्णु पुराण के मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इसी दिन भगवान विष्णु का शालिग्राम के रूप में तुलसी के साथ विवाह करवाने की भी परंपरा है।शाम को घरों और मंदिरों में दीये जलाए जाते हैं और गोधूलि वेला यानी सूर्यास्त के समय भगवान शालिग्राम और तुलसी विवाह करवाया जाता है।

 

सिर्फ 7 दिन है विवाह मुहूर्त

देवउठनी के दिन से विवाह समारोह शुरू हो जाता है। सिर्फ 7 दिनों का मुहूर्त बताया जा रहा है ।25 नवंबर से 11 दिसंबर तक की विवाह मुहूर्त है। फिर उसके बाद सीधा अप्रैल 2021 में बताया गया है।


 

शिव पुराण: चार महीने योग निद्रा से जागते हैं भगवान विष्णु

शिवपुराण के मुताबिक, भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु ने दैत्य शंखासुर को मारा था। भगवान विष्णु और दैत्य शंखासुर के बीच युद्ध लंबे समय तक चलता रहा। युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु बहुत अधिक थक गए। तब वे क्षीरसागर में आकर सो गए। उन्होंने सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव को सौंप दिया। इसके बाद कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी को जागे। तब शिवजी सहित सभी देवी-देवताओं ने भगवान विष्णु की पूजा की और वापस सृष्टि का कार्यभार उन्हें सौंप दिया। इसी वजह से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवप्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है।


 

वामन पुराण: 4 महीने पाताल में रहने के बाद क्षीर सागर लौटते हैं भगवान

वामन पुराण के मुताबिक, भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी। उन्होंनें विशाल रूप लेकर दो पग में पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग लोक ले लिया। तीसरा पैर बलि ने अपने सिर पर रखने को कहा। पैर रखते ही राजा बलि पाताल में चले गए। भगवान ने खुश होकर बलि को पाताल का राजा बना दिया और वर मांगने को कहा।बलि ने कहा आप मेरे महल में निवास करें। भगवान ने चार महीने तक उसके महल में रहने का वरदान दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक पाताल में बलि के महल में निवास करते हैं। फिर कार्तिक महीने की इस एकादशी पर अपने लोक लक्ष्मीजी के साथ रहते हैं।

 


शिवपुराण: वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु बने पत्थर के शालिग्राम

इस साल देवउठनी एकादशी 8 नवंबर को पड़ रही है। इस दिन तुलसी विवाह की भी परंपरा है। भगवान शालिग्राम के साथ तुलसीजी का विवाह होता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसमें जालंधर को हराने के लिए भगवान विष्णु ने वृंदा नामक अपनी भक्त के साथ छल किया था। इसके बाद वृंदा ने विष्णु जी को श्राप देकर पत्थर का बना दिया था, लेकिन लक्ष्मी माता की विनती के बाद उन्हें वापस सही करके सती हो गई थीं। उनकी राख से ही तुलसी के पौधे का जन्म हुआ और उनके साथ शालिग्राम के विवाह का चलन शुरू हुआ।

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